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बेचैन मच्छर ।

Satyendra kumar Upadhyay

Satyendra kumar Upadhyay

लघु कथा

February 19, 2017

कहाँ गया ? कहाँ ग..या ? सारे मच्छर कमरे में रात भर उसे ढ़ूँढ-2 थकहार सुबह होते ही कोनों जा छुपे अँधेरों की गोद में समा गये थे । वहीं शुचि ने उनके छुपने पर मच्छरदानी रूपी मर्दानी धोती आधी कर , जो रात्रि भर ओढ रखी थी ! वह उसे लपेट , चलता बन ही रहा था कि तभी उसके फोन की घंटी बजी कि रात्रि डेढ़ बजे क्या हुआ था ?
वह हक्का-बक्का बना बोला ” कुछ भी नहीं ! तो जबाब मिला कि ठीक बारह बजे हेडक्वार्टर पर अपने मातहतों के संग मिलो ।
वह सोच ही रहा कि लघु मिला पर वह भी सो गया था अतः वह भी कुछ नहीं बता पाया । सभी गये और तीन को तो सस्पेंड कर दिया गया था और मच्छरों को चकमा देने वाले शुचि को मात्र चार्जशीट ।
असलियत तो यह थी रात्रि ड्यूटी में शुचि ने यह फार्मूला बना रखा था कि तुम भी सोओ और मुझे भी डिस्टर्ब न करो ।और आज डेढ़ बजे एक हादसा हो गया और सोने के कारण किसी को भनक तक न लगी और बात मीडिया में चली गयी थी ।
लेकिन सारे मच्छर आज बेहद खुश थे क्योंकि शुचि बिना मर्दाना धोती के जागकर ड्यूटी कर रहा था । टुटपुँजिया नेता जो बन बैठा था और सस्पेंड होने से बच गया और उसकी टीम दिन में आ गयी थी ।

Author
Satyendra kumar Upadhyay
short story writer.
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