Skip to content

*बुरा न बोलो बोल रे*

आनन्द विश्वास

आनन्द विश्वास

कविता

October 4, 2016

*बुरा न बोलो बोल रे*
…आनन्द विश्वास

बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे,
वाणी में मिसरी तो घोलो, बोल-बोल को तोल रे।
मानव मर जाता है लेकिन,
शब्द कभी ना मरता है।
शब्द-बाण से आहत मन का,
घाव कभी ना भरता है।
सौ-सौ बार सोच कर बोलो, बात यही अनमोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
पांचाली के शब्द-बाण से,
कुरूक्षेत्र रंग लाल हुआ।
जंगल-जंगल भटके पांडव,
चीरहरण, क्या हाल हुआ।
बोल सको तो अच्छा बोलो, वर्ना मुँह मत खोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
जो देखोगे और सुनोगे,
वैसा ही मन हो जायेगा।
अच्छी बातें, अच्छा दर्शन,
जीवन निर्मल हो जायेगा।
अच्छा मन, सबसे अच्छा धन, मनवा जरा टटोल रे,
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
कोयल बोले मीठी वाणी,
कानों में रस घोले है।
पिहु-पिहु मन मोर नाचता,
सबके मन को मोहे है।
खट्टी अमियाँ खाकर मिट्ठू, मीठा-मीठा बोल रे।
बुरा न देखो, बुरा सुनो ना, बुरा न बोलो बोल रे।
*****
…आनन्द विश्वास

Share this:
Author
आनन्द विश्वास
आनन्द विश्वास जन्म एवं शिक्षा- शिकोहाबाद अध्यापन- अहमदाबाद और अब- स्वतंत्र लेखन (दिल्ली) प्रकाशित कृतियाँ- *देवम* (बाल-उपन्यास) *मिटने वाली रात नहीं*, *पर-कटी पाखी* (बाल-उपन्यास) *बहादुर बेटी*(बाल-उपन्यास), *मेरे पापा सबसे अच्छे* (बाल-गीत)। पताः :सी/85 ईस्ट एण्ड एपार्टमेन्ट्स, मयूर विहार फेज़-1 नई... Read more

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you