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*** बुधवारी त्योंहार ****

भूरचन्द जयपाल

भूरचन्द जयपाल

कविता

February 14, 2017

मुफ़्त में कोई
बांटता नही
मुहब्बत के लड्डू
ये कोई बुधवारी
त्योंहार नही है
जो गणेश जी
के भोग लगाया
और
सिजदा करके
बडी आसानी से
खा …….लिया
अगर खा भी लो
तो आसानी से
पचता कहाँ है
हो ना हो जिस
आदमी …….को
किसी ……….से
प्यार हो जाये
वो बचता कहाँ है
ना घर का
रहता …………है
और ना घाट का
क्या अब ..भी
तैयार ………हो
खाने ………..को
मुहब्बत का लड्डू
तो ………हमारी
….शुभकामनाऐ
आपके साथ है ।।
?मधुप बैरागी

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Author
भूरचन्द जयपाल
मैं भूरचन्द जयपाल 13.7.2017 स्वैच्छिक सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना... Read more

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