Jun 27, 2016 · कविता
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बुद्धों की इस देवधरा पर…

बुद्धों की इस देवधरा पर……..
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कोई भी त्यौहार देश में
तबतक रास ना आएगा ।
बुद्धों की इस देवधरा पर
जबतक न्याय ना आएगा ।।

जबतक चेतन सुप्त रहेगा
न्याय को नहीं जानेगा ।
तबतक सिद्धों की धरती पर
खुशियाँ ना लहराएगा ।।
बुद्धों की इस देवधरा पर……………..

सदियाँ बीत गये है लेकिन
सत्य हारता आया है ।
निद्रा ना त्यागेंगे जबतक
तबतक न्याय ना आएगा ।।
बुद्धों की इस देवधरा पर……………

असुर राज है,मानव दुर्जन,
पतित ही न्यायाधीश बनेगा।
चोर तिलक लेकर गद्दी पर
सज्जन को धमकायेगा ।।
बुद्धों की इस देवधरा पर…………….

सपनों में ओ जीने वालों
अब देरी हो जाएगा ।
पीढ़ी दर अन्याय विजित हो
होकर कष्ट दिलाएगा ।।
बुद्धों की इस देवधरा पर……………

सामरिक अरुण
NDS झारखण्ड
25 मार्च 2016

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Arun Kumar
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