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बीमार कलम

preeti tiwari

preeti tiwari

कविता

October 7, 2016

कोई नहीं जानता
पर मै जानती हूं
बहुत अच्छा नहीं पर मै लिखती हूं

आज फिर कुछ सुन्दर विचारो के साथ
मै लिखने बैठ गयी

दिल मे धडकन, हाथो मे फडकन ,मस्तिष्क मे विचार
मगर कलम था जैसे बीमार लाचार
कईपन्ने फटे, कई को मैने फाड दिया
समझ न आये आज कलम को क्या हुआ
असफल हुई कई कोशिशो के बाद
अचानक आया मुझे याद
आज मैने किसी का शायद दिल दुखा दिया
जो लिखती हूं उसके विपरीत कुछ किया
क्या सभी के हाथो मे ,ऐसे ही कलम होते है
जो सिर्फ हाथो से नही आत्मा से चलते है
किससे पूंछू कि वो कलम कहां मिलते है
जो कुछ सोचते नही , बस लिखते ,लिखते और लिखते है

Author
preeti tiwari
जज्बातो को शब्दो मे उकेरने का प्रयास है मेरी लेखनी ही मेरे होने का एहसास है
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