कविता · Reading time: 1 minute

बीती यांदे

बीते दिनों को भलो कोन भुला पाएगा ।
जब जब याद करेगा , अंखियों में पानी भर आएगा ।
जवानी के गीत बुढ़ापे में गुन गुनाएगा ।
एक अरसा पहले कभी बीता था ।
एक अरसा फिर से बीत जाएगा ।।
कहानी किस्से, तस्वीरों को देख तुम गुन गुनाओंगे ।
अपने पोते पोती को गोद में बीठाकर तुम अपनी गाथा सुनाओंगे ।।

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