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बीता पल

Vindhya Prakash Mishra

Vindhya Prakash Mishra

कविता

August 13, 2017

फुर्सत के पल में बैठे तो,
याद आ गई बीते पल की।
कितने सुखद अनुभूति हो चली,
बीत गया जो कल की।
यह जीवन अनमोल पलो को,
भूल गया था बल्कि।
बीते परिवर्तन के दिन ,
याद जो आयी आखे छलकी।
किया वही जो सही लगा था
न चिंता की फल की।
झेल रहा था प्रबल समस्या
चाह रही मन मे किसी हल की।

विन्ध्यप्रकाश मिश्र

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Author
Vindhya Prakash Mishra
विन्ध्यप्रकाश मिश्र विप्र साहित्य सृजन में रूचि रखता हूँ । चिंतनशील जीव होने के कारण कुछ न कुछ सृजित करता हूँ । पर वीणापाणि माँ की कृपा दृष्टि के बिना सम्भव नहीं है । एक साधना के रूप में मनन... Read more

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