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बीटीया

Ravinder Singh Sahi

Ravinder Singh Sahi

कविता

January 23, 2017

बाहों में झुलाया, गोदी में खीलाया ।
सिने पर सुलाया, पीठ पर खिलाया ।
खुद रो कर , तुझको हसाया ।
कांटों से बचाया, मल-मल पर सुलाया ।
बेटी होकर बेटे का फर्रज़ नीभाया ।
यह मेरी बिटीया रानी है ।
पिता की प्यारी, माँ को लगे न्यारी ।
यह मेरी बीटीया रानी है, यह मेरी बीटीया रानी है ।
समय बीता, बीते दिन रात ।
आज चली वह लेकर मेरे सपनों की सौगात ।
जो सिखाया माँ ने, सब थी अछी बात ।
आज चली वह रखने अपने पिता की लाज ।
यह मेरी बीटीया रानी है, यह मेरी बीटीया रानी है ।
छोड चली भीगी पलकें, बननें सास-ससुर की लाज ।
यह मेरी बीटीया रानी है, यह मेरी बीटीया रानी है ।

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