कविता · Reading time: 1 minute

बीज

बड़े अरमानो के साथ
बोया था जो बीज
आज लम्बे इन्तजार के बाद
अंकुरित हुआ है वो ।

मिट न जाये वजूद उसका
हर मौसम की मार से बचना है उसे
सपनो का भविष्य है
कमजोर, नाजुक, कोमल है वो ।

तेजी से जिन्दगी के
बदलते हुए हालातों मे
कुछ आखिरी उम्मीदों का
अकेला सहारा है वो ।

घना अनोखा वृक्ष बन
मजबूत जड़ों से उठेगा ऊपर
समय चक्र का जवाब बनेगा
जब फूलों फलो से महकेगा वो ।।

राज विग

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