बीज बोये आपनेजो महराजयोगके :: जितेंद्रकमलआनंद ( पोस्ट११०)

राजयोगमहागीता:: घनाक्षरी क्रमॉक२१/३६,पृष्ठ
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बीज बोये आपने जो महाराजयोग के ये ,
मर्म इनका जान चुका और संतुष्ट हुआ ।
यों स्वयं को सृष्टा – दृष्टा ,नियंता भी जानकर ,
मैं हुआ प्रफुल्लित ही और ह्रष्ट– पुष्ट हुआ ।
यथावत विश्व में ये आना- जाना जानकर ,
शांत हुआ सानंद भी , था जो मन क्षुब्ध हुआ ।
भव्य आत्म – सत्ता की है हुई अनुभूति मुझे ,
भव– ताप संतप्त मैं प्यासा आज तृप्त हुआ ।।

— जितेंद्रकमलआनंद
सॉई बिहार कालोनी, रामपुर –२४४९०१

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