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बिल्कुल भी ना डरे,

Dr. Mahender Singh

Dr. Mahender Singh

कविता

October 10, 2017

निजता प्रस्तुत करे,
बिल्कुल भी ना डरे,
सभी काम सोच-समझ कर करें,
.
कोई जिक्र करे,
कोई फिक्र करे,
कोई तन्हाई से डरे,
कोई खो गया भीड़ में,
कोई कूद पड़ा भाड़ में,
ऐसे जीवन-लीला खत्म ना करें,
.
महेंद्र बन जा,
“मील का पत्थर” समको दिखाई पड़े,
कम से कम हमसफ़र तो ना डरे,
गर डरे भी तो ….,
हौसला बन संग में खड़ा हुआ मिले,
कभी दिल्ली दूर ना लगे,
.
निजता प्रस्तुत करे,
बिल्कुल भी ना डरे,
सभी काम सोच-समझ कर करें,
बस निजता प्रस्तुत करें,
.
डॉ महेंद्र सिंह खालेटिया,

Author
Dr. Mahender Singh
(आयुर्वेदाचार्य) शौक कविता, व्यंग्य, शेर, हास्य, आलोचक लेख लिखना,अध्यात्म की ओर !
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