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बिन माँ कुछ कल्पना नहीं

दुष्यंत कुमार पटेल

दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

कविता

July 25, 2016

इस सृष्टि में भगवान है
माँ के रूप में विघमान है
बिन माँ कुछ कल्पना नहीं
माँ है तो सारा जहान है

जो हर लेती हर दुःख को
माँ अलैकिक शक्ति रूप है
हर पहर करू आरती श्रद्धा से
माँ भगवान की स्वरुप है

हँसके गलतियाँ करती है माँफ
माँ करुणा-दया का सागर है
जहाँ जीवन की शुरुवात होती है
माँ वो पहली ऐसी डगर है

उजाला देने वाली माँ चंद्रसूर्य है
माँ की महिमा जग में अपार है
माँ हमें चरणों में रखना सदा
माँ तू ही ज़िन्दगी की आधार है

तुम्हारी प्रेरणा में हर जीत है,
माँ तू ही भविष्य तू ही अतीत है
माँ तुम्हें पाके “दुष्यंत” पुलकित है
माँ सारा जीवन तुमपे समर्पित है

Author
दुष्यंत कुमार पटेल
नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com
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