कविता · Reading time: 1 minute

बिन माँ कुछ कल्पना नहीं

इस सृष्टि में भगवान है
माँ के रूप में विघमान है
बिन माँ कुछ कल्पना नहीं
माँ है तो सारा जहान है

जो हर लेती हर दुःख को
माँ अलैकिक शक्ति रूप है
हर पहर करू आरती श्रद्धा से
माँ भगवान की स्वरुप है

हँसके गलतियाँ करती है माँफ
माँ करुणा-दया का सागर है
जहाँ जीवन की शुरुवात होती है
माँ वो पहली ऐसी डगर है

उजाला देने वाली माँ चंद्रसूर्य है
माँ की महिमा जग में अपार है
माँ हमें चरणों में रखना सदा
माँ तू ही ज़िन्दगी की आधार है

तुम्हारी प्रेरणा में हर जीत है,
माँ तू ही भविष्य तू ही अतीत है
माँ तुम्हें पाके “दुष्यंत” पुलकित है
माँ सारा जीवन तुमपे समर्पित है

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