"बिन तेरे"

“बिन तेरे”

बिन तेरे यूँ आदत डाल ली जीने की
जीते भी हैं ,और जीने का मज़ा भी ले लेते हैं
गुफ़्तगू ख्वाबों में करते हैं तुमसे
और गुफ़्तगू का मज़ा भी ले लेते हैं
बिन तेरे यूँ आदत डाल ली जीने की हमने

यूँ आओगे अक्सर बेचैनियाँ बनकर
बेचैन भी होते हैं
और बेचैनियों का मज़ा भी ले लेते हैं
बिन तेरे यूँ आदत डाल ली जीने की हमने

यूँ तडपाएगी तन्हाई अक्सर ,तन्हाइयाँ बनकर
तन्हा भी होते है
और तन्हाईयो का मज़ा भी ले लेते है
बिन तेरे यूँ आदत डाल ली जीने की हमने 💞

✍वैशाली
29.11 2020

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मुझे हिंदी में काफी रूचि है. विदेश में रहते हुए हिन्दी तथा अध्यात्म की तरफ...
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