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बिन तुम्हारे जिंदगी अधूरी सी है/मंदीप

Mandeep Kumar

Mandeep Kumar

गज़ल/गीतिका

September 17, 2016

बिन तुम्हारे जिंदगी अधूरि सी है/मंदीप

बिन तुम्हारे जिन्दगी अधुरी सी है,
बिन तुम्हारे कुछ कमी सी है।

ख़ुशी होती देख तुम्हे जिन आँखो को,
आज उन्ही आँखो में नमी सी है।

अटकी सी गई जिंदगी बिन तुम्हारे,
अब मेरी ही सासे मुझ से रूठी सी है।

तुम से बढ़ कर की मैने चाहत तुम्ही से,
फिर भी मेरी कहानी क्यों अधूरी सी है,

हो सके तो स्माल लेना हम को,
अब बिन तुम्हारे ये जिंदगी बिखरी सी है।

हुआ एहसास “मंदीप” को क्यों आज तुम्हारा,
लगता है आज पूर्वी हवा कुछ बदली सी है।

मंदीपसाई

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Author
Mandeep Kumar
नाम-मंदीप कुमार जन्म-10/2/1993 रूचि-लिखने और पढ़ाने में रूचि है। sirmandeepkumarsingh@gmail.com Twitter-@sirmandeepkuma2 हर बार अच्छा लिखने की कोशिस करता हूँ। और रही बात हम तो अपना दर्द लिखते है।मेरा समदिल मेरे से खुश है तो मेरी रचना उस के दिल का... Read more
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