बिना पेट की लाश

“बिना पेट की लाश”

वह एक छोटे से शहर में रहने वाला एक बड़ा ही साधारण व्यक्ति था उसे किसी चीज की परवाह नहीं थी किंतु दो वक्त की रोटी तो सभी की आवश्यकता होती है। पर शायद उसकी यह भी न थी। गरीब जो था एक वक्त की रोटी भी बड़ी मेहनत से पाया करता था। पिछले कुछ समय में तो उसने वह दौर भी देख ही लिया था जब वह हफ्तों में एक दिन खाना पाता था। बड़ा कठोर समय था
लेकिन यह सब यहीं पर नहीं ठहरा आज से कुछ दिनों पहले की ही तो बात है मैंने उससे अपनी आँखों से यह करते देखा था। यकीन नहीं था कि कोई इस हद तक भूखा हो सकता है। वह जूठन में से निवाला बीन रहा था ।पर यह सच था वह जूठन में कुछ उठा कर खा रहा था। पता नहीं क्या? पर कुछ तो था।
यकीन न था कि मैं आज इस समय में अपनी आँखों से यह सब देख रहा हूँ। पर यह सच था। बड़े से शहरों के इन छोटे-छोटे इलाकों पर ध्यान ही कौन देता है?
आज से पहले वह आखरी समय था जब मैंने उसे देखा था फिर वह पिछले कई दिनों से मुझे नहीं दिखा आज सुबह जब उसके कुछ साथियों को लोगों के आगे पीछे घूमते, रोते देखा तो रहा न गया, जा कर पूछ लिया क्या हुआ क्या बात है?

साहब बाबू वहां मरा पड़ा है थोड़ा सहयोग मिल जाए तो उसे श्मशान तक ले जा लेंगे। माना कि वह गरीब था लेकिन यह अधिकार तो ईश्वर ने उसे भी दिया है।

हाँ – हाँ क्या सहयोग चाहते हो बोल?

अरे-अरे साहब आप भी किसके जाल में आ रहे हैं? यह तो इनका रोज का धंधा है रोज आते हैं ऐसे ही हजारों किसी न किसी तरह हराम की रोटी पाने के लिए।

लेकिन कोई इस तरह मौत के नाम पर भी झूठ नहीं बोलेगा

अरे साहब देखने से तो पढ़े-लिखे लगते हो। क्या वह कफ़न वाली कहानी नहीं पढ़ी? यह भी वैसे ही हैं कफन के पैसों से एैश करेंगे अपना और अपने घर वालों का पेट भरेंगे। सब पेट के पापी है

नहीं साहब ऐसा नहीं है

ठीक है पर यह बताओ वह कौन आदमी है?

क्या बताए साहब? क्या आपको लगता है उसकी कोई पहचान होगी?

हाँ- हाँ पहचान क्यों नहीं होगी?

क्या साहब आप भी गरीब आदमी का मजाक उड़ाते हैं।

मुझे उसकी पहचान नहीं बताई

साहब हम झूठ नहीं कहते आप खुद ही चल कर देख लीजिए वहाँ उस टीले के पार धूल में पड़ा है।

धूल में, धूल में क्यों?

गरीबी का बिछौना तो धूल ही होती है साहब।

मैं दंग था एक दौड में ही टीले के उस पार तक पहुंच गया। एक झलक में ही मैंने उसे पहचान लिया था। यह वही आदमी था जिससे मैंने उस दिन जूठन के ढेर के पास देखा था। उसकी हालत बहुत खराब थी। उसे देख उसकी एक-एक पसली को गिना जा सकता था। मेरी हामी के बाद उसे उठाया गया धूल तन पर थी तो आभास नहीं था किंतु बाद में उसे देखा तो समझ ही नहीं आ रहा था कहां पर छाती है और कहां पर पेट, पेट और पीठ मानो एक ही हो गए थे।
बड़ा अजीब दृश्य था जिस आदमी पर पेट के लिए पाप के आरोप लगाए जा रहे थे उसका पेट तो कब का छीन चुका था और उसकी लाश भी ऐसी प्रतीत हो रही थी मानों बिना पेट की हो।

मैं निराश था उन्हें कहा कि आप जाकर अंतिम संस्कार की तैयारी करें और जो भी सामान लगता है ले आए पैसे मुझसे ले जाए।

तभी कुछ लोग वहाँ इकट्ठा हो गए तोंद निकली हुई थी और आवाज में रौब था संभवत यह पेट के पुण्यवान और कहानियों के पढ़े-लिखे लोग थे।

अरे भाई क्या हुआ क्यों भी लगा रखी है कोई मेला लगा हुआ है क्या?
जिसे मरना था वह मर गया अब क्या चाहते हो उठाकर ले जाओ उसे।

नहीं, कुछ देर रुके वह अंतिम संस्कार का सामान लाने गया है वह आ जाए फिर इसे ले जाकर इसका क्रिया कर्म कर देंगे।

तब तक यहाँ पर भी लगाए रहोगे क्या?

अच्छा कुछ देर रुके कम से कम कफन तो ले आनें दें।

अच्छा….
तुम्हारा सगा था क्या?

नहीं मेरा सगा तो नहीं था।

अच्छा तो मसीहा बनना चाहते हो, अरे मसीहा बनना चाहते हो तो जाकर किसी की मदद करो, किसी स्कूल में दान दो, किसी मंदिर में दान दो धर्म के कार्य करो, समाज सेवा करो लोग याद रखेंगे और तस्वीर भी छपेगी की अखबार में।
और अगर तस्वीर नहीं छपवानी हो तो नाम ही बता देना कम से कम लोग नाम तो याद रखेंगे।
यहाँ क्यों पैसे फूकता है।

और तुम लोग किस बात का इंतजार कर रहे हो उठा कर ले जाओ उसे यहाँ से और दफना दो कहीं ले जाकर किसे पता कि दफनाने के पहले क्या हुआ।
कोई पूछे तो कह देना कि सब अच्छी तरह हो गया था। जैसा तुम बोलोगे लोग वही मान लेंगे।
और वैसे भी जिसे जीते- जी रोटी ना मिली उसे कफन दिला कर क्या करोगे यह भी कोई बात है बेवकूफ कहीं के। ले जाओ उठाकर।

मैंने विरोध किया और वह लोग मुझे ज्ञान की कुछ बातें और कहते हुए वहाँ से आगे बढ़ गए।

संवाद वहीं खत्म हो गया मैंने किसी तरह सब के खिलाफ जाकर उसका अंतिम संस्कार कराया फिर अपने घर लौट आया।
लेकिन कुछ प्रश्न बार-बार मेरे जहन में आते रहे
गलत कौन था? क्या उन लोगों की बातें सही थी? क्या मैं गलत था?
जो भी हो पर यह सब कल्पना से परे था जो आज सच होते देखा।

भवानी प्रताप सिंह ठाकुर
भोपाल म. प्र.
संपर्क – 8989100111
ईमेल – thakurbhawani66@gmail.com

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