Jan 10, 2017 · कविता
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बिटिया

घर आँगन की शान है बिटिया,माँ की जैसे जान है बिटिया
बिटिया घर की रौनक होती, चेहरे की मुस्कान है बिटिया

ख़ुशी ख़ुशी हर गम को सहती, हर खुशियों में आगे रहती
बिटिया से घर बनता जन्नत, ईश्वर की वरदान है बिटिया

बिटिया घर का बड़ा सहारा, घर का इन पर बोझ है सारा
बिटिया माँ की ताकत है, पापा का अभिमान है बिटिया

बिटिया खुशबु आंगन की है, बिटिया कलियां दामन की है
बिटियां ही महकाती जीवन, पूरा एक बागान है बिटिया

बिटिया माँ की छाया बनकर, लक्ष्मी सी वो काया बनकर
सबके रग में रची बसी सी, घर की एक मेहमान है बिटिया

लगा के मेहँदी पहन के बिंदिया,छोड़के अपनी मीठी निंदिया
जिस दिन छोड़ेगी बाबुल को,उस दिन से अंजान है बिटिया

हर हाल ढल जाती बिटिया , फिर कैसे जल जाती बिटिया
कैसे साथ जाऊं सजन के, यह सोच सोच हलकान बिटिया

इस दुनिया में आने से पहले, ममता माँ की पाने से पहले
कोख में जो मारी जाती , नन्ही सी एक जान है बिटिया

जो कुछ बेटा कर सकता है, वह सब बिटिया कर सकती है
बेटों के समान है बिटिया , अब कहाँ गुमनाम है बिटिया

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छतीसगढ़ के कोरिया जिले से हूँ, संवेदंशील विषयों पर मंचीय कविताएं लिखता हूं, श्रृंगार को... View full profile
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