बिटिया

बिटिया को खूब पढ़ाया है
जीवन को जीना सिखाया है
उसे कैसे नम आँखे दिखाऊँ
यह सोच के दिल घबराया है
नटखट सी है वो मेरी गुड़िया
फिर से रूठा चेहरा बनाया है
तुझ मे बसती मेरी सारी हंसी
आज उसने ही हमें रुलाया है
विदा कैसे करू में बिटिया को
पलको पर सदा जिसे बिठाया है
_____________अभिषेक शर्मा

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