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बिटिया रानी

Pushpendra Rathore

Pushpendra Rathore

कविता

January 10, 2017

एक अनलिखी अनपढ़ी कहानी हूं,
मैं जूही, चंपा व रातरानी हूं,

हंसता बचपन और गुड्डे गुङिया,
मैं तो बाबा की बिटिया रानी हूं,

बङी हुई तो रंगत गोरी निखरी,
पर मैं शापित व पीङित जवानी हूं,

वहसी नजरें, शोषित जीवन, दहेज,
पिता का झुका शीश, परेशानी हूं,

मेरी वजह से सहते बहुत बाबा,
क्या ईश्वर की भूल व नादानी हूं,

पर बाबा विश्वास करो, मैं कम कब,
मैं गौरव की अनसुनी कहानी हूं,

इंदिरा, कल्पना व नीरजा हूं,
मैं ही तो झांसी की मर्दानी हूं,

तेरे भाल का तिलक बनती बाबा,
मैं तेरी बिटिया बङी सयानी हूं,

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Author
Pushpendra Rathore
I am an engineering student, I lives in gwalior, poetry is my hobby and i love both reading and writing the poem

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