Jan 18, 2017 · कविता
Reading time: 1 minute

बिटिया प्यारी

उजियारा लेकर के आई अँधेरे इस जीवन में,
बहुत ख़ुशी थी घर पे सबको, था उल्लास भरा सबके मन में
लोग न जाने फिर भी क्यूँ बेटो पे ही खुश होते हैं,
बिटिया तो एक छाया बृक्ष है कांटो भरे इस बन में

उजियारा लेकर के आई अँधेरे इस जीवन में,

उंगली पकड़ के मेरी जब साथ मेरे वो चलती है
नन्हे नन्हे पैरो से जब गिरती और संभलती है
सब मिल जाता उसके हंसने से, क्या रखा किसी धन में

उजियारा लेकर के आई अँधेरे एक जीवन में,

साथ छोड़ देंगे बेटे एक दिन बेटी ही काम आएगी,
पराये घर पे होक भी वो मेरा मान बढ़ाएगी
बेटी है बेटो से बढ़कर फिर क्यूँ रहे तू उलझन में

उजियारा लेकर के आई अँधेरे इस जीवन में,
बहुत ख़ुशी थी घर पे सबको, था उल्लास भरा सबके मन में

विवेक कुमार शर्मा

Votes received: 38
360 Views
Copy link to share
Vivek Sharma
10 Posts · 525 Views
Follow 1 Follower
नाम : विवेक कुमार शर्मा उपनाम : विवेक बिजनोरी जन्म तिथि : ०९/१०/१९९१ जन्म स्थान... View full profile
You may also like: