बिंदास लड़कियाँ

हाँ इस शहर की थी हम बिंदास लड़कियाँ
लोग देखते हमें,
आहें भरते पर औरों को नसीहत करते
इनकी तरह मत होना,
हाँ,हम में होने जैसा था ही क्या?
सो, हम भी खुद की तरफ़ देखने वालों को
यही हिदायत देतीं
हाँ,हमारी तरह मत होना
हमारी तरह होने का मतलब था,
बोलना,बिंदास हँसना,
खुल कर जीना और रोना,
बेतरतीब दुपट्टे का होना,
या ना भी होना,
आस्तीनों का ऊपर होना,
बेपरवाह , लापरवाह होना, दुनिया से
पर थी हम इस शहर की जान लड़कियाँ
जिन पर शहर था हरदम ऊँगली उठाता
परन्तु, हमने इस शहर को
बड़ी ही सहजता से अपनाया
ऐसे जैसे कोई घर आए,
भूख लगे,फ्रिज खोले,
जो मिले वो खाए,
सोफ़े पर पसरे और टीवी में खो जाए;
ऐसे जैसे किसी को नींद आए,
बत्तियाँ बुझाए,कम्बल खोले,
लेटे और सो जाए।
हाँ इस शहर की थीं हम बिंदास लड़कियाँ
हमने तब पीया वो ,जो वर्जित था
देवी का राक्षसी बनने के लिए
जब हमारे पास
पीने को बहुत कुछ था
जीने को कुछ नहीं।
हम शब्द बनीं, ऋतुएँ बनीं
रुचियाँ बनीं
हम हर वो शय बनीं
जो हमें उपलब्ध न थी।
ऐसा नहीं है कि
हम कुछ और नहीं कर सकती थीं
कुछ और यानी,
किसी दो कौड़ी की परीक्षा में
आ सकती थीं अव्वल,
या फिर, मान सकतीं थीं,
इस शहर की हर बात
खुश कर सकतीं थीं हम,
सारी क़ायनात को एक साथ,
भर सकतीं थीं कोई भी दो कौड़ी का फॉर्म,
बदल सकतीं थीं अपनी तक़दीर
परन्तु, हमने प्रेम करना चुना
एक ऐसे शहर से,
जिसे पता भी नहीं था
प्रेम कैसे किया जाता है।
ऐसा नहीं है कि हम कुछ और नहीं हो सकतीं थीं,
लेकिन, हमने सहर्ष चुना बर्बाद होना
हमने चुनाव का हमेशा सम्मान किया
इसलिए हमें इस बात का ज़रा भी मलाल नहीं रहा
कि हम भीड़ से अलग खड़ी थीं,
हाँ,इस शहर की हम बिंदास लड़कियाँ थीं
और हमने इस तमगे का कभी दिखावा नहीं किया।
हम देर-सबेर घर आती रहीं
चीख़ती रहीं,चिल्लाती रहीं
हमने तब आवाज़ की,
जब चुप रहना,हर तरह से
फ़ायदे का सौदा बताया गया था।
हम मुर्दों के बीच रहकर भी मरीं नहीं
हमने शहर को मरघट बताया
और मरघट पर शहर बसाने का ख़्वाब सजाया,
हमें जब भूख लगी,हमने शहर खाया,
हमें जब प्यास लगी,हमने शहर पीया
जब बढ़ने लगा कोलाहल
शहर ने हम में पनाह ली,
हमने अपने भीतर, बहुत भीतर
शहर को ज़िंदा रखा
क्यूँकि
इस शहर की हम सबसे बिंदास लड़कियाँ थीं

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