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बाज़ार लगता है

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

November 10, 2017

मैं कुछ अच्छा कहूं तो भी तुझे बेकार लगता है।
ये एक दो बार नहीं रे तुझको तो हर बार लगता है।।

मैं दिल से तो नहीं कहता फ़क़त मेरा तजुर्बा है।
वही देता दिल को ज़ख्म जो सच्चा यार लगता है।।

ये तुम कहते हो मुझको याद भी करते नहीं क्योंकर।
तेरी यादों का मेरे दिल में तो बाजार लगता है।।

भिगोया , हो गया, धोया कि इंटरनेट के युग में।
मेरे बेटे को लेकिन ये ही सच्चा प्यार लगता है।।

ये मिसरे, शे’र, तन्हाई, ग़ज़ल औ गीत या कविता।
मुझे तो अब यही मेरा “विजय” घरबार लगता है।।

विजय बेशर्म 9424750038

Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
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