बाग़ को फिर आज महका दीजिये

बाग़ को फिर आज महका दीजिये
बिन पिलाये मीत बहका दीजिये ।।1

आग सावन ने लगाईं खूब जो
और इसको आज दहका दीजिये।।2

साज दिल के बज उठे हमदम सभी
चाल अपनी आज लहका दीजिये।।3

आशिकाना हो रहा मौसम गजब
हमनवां आँचल ही ढलका दीजिये।।4

एक तराना प्यार का गाकर जरा
हमसफ़र दिल को ही चहका दीजिये।।5

“दिनेश”

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