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“बाहर क्यों सन्नाटा है”

Dr.Nidhi Srivastava

Dr.Nidhi Srivastava

कविता

February 16, 2017

मन में इतना शोर मचा है,
बाहर क्यों सन्नाटा है।
गहरे दरिया में तूफान घना है,
साहिल क्यों घबराता है।
मन में इतना शोर मचा है,
बाहर क्यों सन्नाटा है।
ओर मिले ना छोर जहां पर,
एेसा भँवर फसाया है।
मन में इतना शोर मचा है,
बाहर क्यों सन्नाटा है।।
…निधि…

Author
Dr.Nidhi Srivastava
"हूँ सरल ,किंतु सरल नहीं जान लेना मुझको, हूँ एक धारा-अविरल,किंतु रोक लेना मुझको"
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