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बार-बार – गज़ल/गीतिका – डी के निवातिया

डी. के. निवातिया

डी. के. निवातिया

गज़ल/गीतिका

December 4, 2017

बार-बार

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वो कौन है जो दिल को दुखाता है बार-बार !
अश्क बहते नहीं दिल कराहता है बार-बार !!

वफ़ा संग बेवफाई दस्तूर पुराना है जमाने का
फिर क्यों दास्ताँ जमाने को सुनाता है बार बार !!

जी भर के खेला है, मनमर्जी तोडा मरोड़ा है,
बड़ी संगदिली से रिश्ता निभाता है बार-बार !!

वो सितम करे,या रहम करे, किसे परवाह है
कुछ बात है जो दर्द-ऐ-दिल भाता है बार बार !!

“धर्म” को भी जिद है फना हो तो उसी के हाथ हो
इश्क में जां लुटाने में, मज़ा आता है बार बार !!

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डी के निवातिया

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Author
डी. के. निवातिया
नाम: डी. के. निवातिया पिता का नाम : श्री जयप्रकाश जन्म स्थान : मेरठ , उत्तर प्रदेश (भारत) शिक्षा: एम. ए., बी.एड. रूचि :- लेखन एव पाठन कार्य समस्त कवियों, लेखको एवं पाठको के द्वारा प्राप्त टिप्पणी एव सुझावों का... Read more
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