.
Skip to content

बारिश

Abhinav Kumar Yadav

Abhinav Kumar Yadav

गज़ल/गीतिका

July 12, 2017

ये बारिश की बूंदे जो भिगो देती हैं,
तेरी यादों को दिल में पीरो देती हैं,
हँस के करते हैं याद पर ये रूला देती हैं,
तेरी यादें क्यों हमको ये सजा देती हैं,
अगर मैं पास आना चाहूँ भी कभी तेरी आदते आने देती नहीं,
क्या कभी तुम्हें ऐहसास होता नहीं,
अपनी गलतियों की मुझको सजा देती हो,
ये कैसा फर्ज है जो अदा करती हो,
चाह कर भी न मैं तुमसे मिल पाता हूँ,
न जाने कैसे में जी पाता हूँ,
तुम समझती क्यों नहीं मैं तुम्हारा इंतज़ार करता हूँ,
तुम्हारे इन्कार पर भी मैं ऐतबार करता हूँ!!
अभिनव

Author
Recommended Posts
मुक्तक
कभी गम कभी मुझको तन्हाई मार देती है! तेरी तमन्नाओं को जुदाई मार देती है! मैं राहे-इंतजार में बैठा हुआ हूँ लेकिन, ऐतबार को तेरी... Read more
संज्ञा
जी हाँ, संज्ञा हूँ मैं। व्यक्ति या वस्तु? कभी-कभी ये बात सोच में डाल देती है रूप है, रंग है आकार भी है दिल भी... Read more
मुक्तक
क्यों तेरी तमन्नाओं से मैं छिपता रहता हूँ? क्यों अपनी बेबसी को मैं लिखता रहता हूँ? नाजुक से हैं ख्याल मगर चुभते हैं जब कभी,... Read more
माँ,,,,,,,
मुक्तक (1) मोहब्बत से भरा एक पल भी वो खोने नहीं देती, मेरे ग़म में भी तन्हा वो मुझे होने नहीं देती। मैं सर गोदी... Read more