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बारिश

Naval Pal Parbhakar

Naval Pal Parbhakar

कविता

April 11, 2017

बारिश

उदक फुदक-फुदक कर ,
छन-छन-छनकता हुआ,
मेघों के पारभाषी आंचल से
टपक-टपक-टपक रहा ।

तरूवर चुप खड़े निढाल से
फुनगियों को अंदर मुंदे हुए
मोती सा धरती पर गिरता
छप की ध्वनि कर रहा ।

मेघों के पारभाषी आंचल से
टपक-टपक-टपक रहा ।

चमकीली दमकीली यामिनी
नवल धवल स्वच्छ चांदनी
नौका रूपी मेघों के मध्य
तड़-तड़ कौंधती हैं बिजलियां

मेघों के पारभाषी आंचल से
टपक-टपक-टपक रहा ।

नवल पाल प्रभाकर

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