कविता · Reading time: 1 minute

“बारिश”

रिमझिम रिमझिम गीत सुना रही है।
बारिश भी जोरों से आ रही है।।
एक एहसास पुरानी ,
मन में फिर से मेहका रही है।
बारिश भी जोरों से आ रही है।।
सावन में उमंगों को,जीवन के रंगो का,
मन में उलझन जगा रही है।
बारिश भी जोरों से आ रही है।।
बूंद गिर तन पीड़ा जगा रही है,
तुमसे विरह वेदना गा रही है।
कब आओगे मुझसे मिलने,पतझड़ भी अब लगे है खिलने,
शीतल हवा तन छू याद दिला रही है।
बारिश भी जोरों से आ रही है।।
रिमझिम रिमझिम गीत सुना रही है।
बारिश भी जोरों से आ रही है।।

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