Jun 19, 2018
हाइकु · Reading time: 1 minute

बारिश

निर्वात सांझ
दीदार बारिश का
काव्य_जन्म पे
….
मेरी रचना
खुब रंग रुप ले
बीच बारिश
….
भावुक होने
चले थे वे बादल
मेरी तरह
….
प्यासी रैना थी
गर्म ग्रीष्म कालीन
तृप्त हो गई
….

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