Skip to content

बारिश

Neelam Sharma

Neelam Sharma

गीत

July 22, 2017

बारिश
उमड़ उमड़ रहे घुमड़ घुमड़,
घन बरसाने को वर्षा
घरड़ घरड़ सुन गरज गरज,
प्यासी धरा उर हर्षा।

छम छम बूंदें बाज रहीं,
थिरके प्रकृति अलबेली।
श्रावण माह में पड़ गये झूले,
सखियां करें अठखेली।

हुलस हुलस कर कुहके कोयल,
मधुर शहद सी उसकी बोली।
आ हाथ पकड़ बरसात में भीगें,
हम तुम सजना हमजोली।

मेह, वृष्टि, बारिश और बर्खा,
पिया मिलन की आस जगाती।
होले से नटखट पुर्वा कुछ कहकर,
मोहे छेड़ छेड़ हाय जाती।

नव दुल्हन से खिले वन-उपवन
सुमन,तरु- ताड़,लता-वल्लरी,
मिटी तपन ज्वर ग्रसित धरती की,
हुई अतिशय भाव विहल्ल री।

सुन वर्षा, संपूर्ण प्राणी जगत का,
अमिट आस विश्वास है तुम पर।
झमाझम बूंदों से प्यास बुझादो,
बरसकर गांव,शहर,महानगर।

तेरी रिमझिम से ए बरसात,
अचला करती सोलह श्रृंगार ।
तेरे आगमन से श्रावण में,
छाई मनहर बयार बहार।

कहे नीलम प्यारी वर्षा-वृष्टि,
स्याह मेघ-घन साथ ले आओ।
करुं करबद्ध अरज,निवेदन
प्यासी वसुधा की प्यास बुझाओ।

नीलम शर्मा

Share this:
Author
Neelam Sharma

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

आज ही अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें और आपकी पुस्तक उपलब्ध होगी पूरे विश्व में Amazon, Flipkart जैसी सभी बड़ी वेबसाइट्स पर

साथ ही आपकी पुस्तक ई-बुक फॉर्मेट में Amazon Kindle एवं Google Play Store पर भी उपलब्ध होगी

साहित्यपीडिया की वेबसाइट पर आपकी पुस्तक का प्रमोशन और साथ ही 70% रॉयल्टी भी

सीमित समय के लिए ब्रोंज एवं सिल्वर पब्लिशिंग प्लान्स पर 20% डिस्काउंट (यह ऑफर सिर्फ 31 जनवरी, 2018 तक)

अधिक जानकारी के लिए यहाँ क्लिक करें- Click Here

या हमें इस नंबर पर कॉल या WhatsApp करें- 9618066119

Recommended for you