गज़ल/गीतिका · Reading time: 1 minute

” बारिश की बूंदें “

ये जो बारिश की बूंदें है ,
गगन से धरती पर गिरे जा रही है ।
तुम्हें तो नहीं लेकिन ,
तुम्हारी सौगात ला रही है ।।

ये जो बारिश की बूंदें है ,
तन को भिगोए जा रही है ।
तुम तो कुछ कहते नहीं लेकिन ,
तुम्हारी मन के गीत ये गुनगुना रही है ।।

ये जो बारिश की बूंदें है ,
जमीं पर गिर के बिखर जा रही है ।
तुम तो बयां करते नहीं लेकिन ,
तुम्हारा हाले दिल मुझे महसूस करा रही है ।।

ये जो बारिश की बूंदें है ,
पत्तियों पर गिर शबनम बिखेरे जा रही है ।
तुम तो पास हो नहीं लेकिन ,
तुम्हारे प्यार का एहसास करा रही है ।।

🙏 धन्यवाद 🙏

✍️ ज्योति ✍️
नई दिल्ली

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