बारिश की बरसती बूंदो से

शाम से एक लहर है मन्न में ,
बारिश की बरसती बूंदो से,
फिर हस भी देगी, बरस पड़ेगी,
सोने ना देगी, चमक पड़ेगी,
कह डाला जो, उठो ना निंदो से,

शाम से एक लहर है मन्न में ,
सागर में बहने को पागल,
तेज चली, सागर में नदियों से,
आज भी बरसी, कल भी बरसी है,
ऊँचे पर्वतो में, ऊँचे अम्बर से,

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‘‘तनहा शायर हूँ’’ | यश पाल सेजवाल ( जन्म 10 मार्च 1 9 80 ),...
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