कविता · Reading time: 1 minute

बारिश की पहली बूँदें

गर्मी की तपन से अकुलाया ये मन,
तपती धरती और तपता वातावरण,
पेड़ पौधे पशु पक्षी भी अकुलाए से,
मौसम की पहली बारिश छाया उमंग।
बारिश की बूंदें जब गिरी धरा पर,
प्यासी धरती की मानो प्यास बुझे,
बूँदें पड़ी जब खेतों खलिहानों में,
किसानों के आँखें में बिजली चमक उठे।
हर तरफ जल और छाई हरियाली,
वर्षा अपने संग लेकर आई है खुशहाली,
फसलों के लिए अमृत समान बना जल,
खेतों में फिर से चहल पहल है जगे।
मेढ़क की टर्र टर्र छेड़े अद्भुत तान,
झींगुर की झंकार गाये मधुर गान,
बैलों को लेकर चला खेत में है किसान,
बैलों के गले की घंटी की निराली शान।
बरसात की पहली बूंदें ले आये एहसास,
फसलें होंगी खूब ये मन में है विश्वास,
अन्न से भरे होंगे ये खेत खलिहान,
दिन सुनहरे होंगे किसानों की जगाए आस।

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