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बाबा हमको बचा लो न !

एक बार की बात है, दो परिवारों के बीच नया रिश्ता जुड़ता है, जिनमें एक परिवार दूसरे परिवार के घर में उसकी बेटी को बहु के रूप में भेजने के लिए एक अनोखी शर्त के साथ तैयार होता है।
लड़की के घर वालों की शर्त मानने के लिए कुछ सीमा तक लड़के वाले विवश भी थे क्योंकि लड़के वालों का स्तर लड़की वालों के स्तर की तुलना में आर्थिक रूप से बहुत नीचे था।
लड़की वालों ने शर्त रखी कि शादी के दिन लड़के वालों के साथ बारातियों के रूप में घर का कोई वृद्ध व्यक्ति नहीं आना चाहिए और वहाँ हमारे ढंग से कार्य होंगे। लड़के वालों ने सोचा लड़की वाले धनी हैं तो इतना अहंकार उचित है और क्या समस्या है अगर शादी में घर के वृद्धजन उपस्थित न भी हों। लड़की वाले धन, व्यापार, मकान, भूमि, इत्यादि माँग से भी अधिक देने को तैयार हैं और यह सब मिलता है, तो घर के वृद्धजन की सेवा के लिए संसाधन की कमी नहीं होगी, अतः यह सब उनके भी हित में ही है।यह सब लड़के के घर में उपस्थित सभी वृद्ध व्यक्तियों को बताया गया।
इस प्रकार से लड़के के घर वाले आपसी परामर्श से यह निर्णय लेते हैं कि लड़की वालों की शर्त मां ली जाए। इतने में लड़के के दादा जी ने कहा “तुम सब शर्त के अनुसार वहाँ जाओगे तो वे लोग शादी तोड़ देंगे, अतः मुझे किसी प्रकार से छुपा कर साथ ले चलो। इसका कारण मैं अभी तुम सभी को बता तो सकता ही हूँ किन्तु समझा नहीं सकता। तुम लोगों को मैं लड़की वालों की इस शर्त का कारण प्रयोगात्मक ढंग से वहीं पर समझूंगा।”
वैसा ही किया गया। बारात में दादा जी एक अलग गाड़ी में छुपा कर ले जाए गए। वे सभी लोग, जिनके पास शर्तानुसार अंदर विवाह स्थल पर जाने की अनुमति थी, स्थल पर गए।
वहाँ लड़की के पिता ने कहा “आप सभी को पानी पिलाने से पहले हम लोग गुड़ खिलाना चाहते हैं। हमारे पास आपको खिलाने के लिए गुड़ से बनी हुईं पचास बट्टियाँ हैं और प्रत्येक बट्टी का भार दस किलोग्राम है। आप अभी को ‘गुड़ की बट्टियाँ’ खा कर पूरा का पूरा पाँच कुंटल गुड़ समाप्त करना होगा और उसके बाद विवाह की प्रक्रिया आरम्भ होगी और आप सभी भोजन ग्रहण करेंगे।”
सभी बाराती व्याकुल हो उठे कि इतना गुड़ खा कर कैसे समाप्त किया जाए और तभी उनमें से एक बाराती ने जा कर दादा जी को सारी बात बताई तो दादा जी ने हँसते हुए कहा “इतनी सी पहेली में विवेक ने काम करना बंद कर दिया।
अरे मूर्खों, तुम लोग लगभग सात सौ बाराती हो और गुड़ है मात्र पाँच कुंटल। अब गुणा-भाग कर के बुद्धि लगाओ, तो प्रत्येक व्यक्ति पर लगभग सात सौ चौदह ग्राम गुड़ आएगा। तुम लोग लड़की वालों से कहो कि गुड़ की सारी बट्टियाँ वे एक साथ परोस दें, उसके बाद तुम लोग एक एक बट्टी को फोड़ो और एक साथ मिल कर बातें व हँसी टटोली करते हुए खाओ। गुड़ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि वह सरलता से मुँह में घुल जाया करता है और पेट भरा हुआ नहीं लगता।
ऐसे सात सौ चौदह ग्राम या एक किलोग्राम भी हो, तो खाने में तुम सभी लोगों को न अधिक समय लगेगा और न ही कोई समस्या होगी।”
उस बाराती ने यह योजना अन्य बारातियों को बताई और सभी ने यह बात लड़की के पिता के समक्ष प्रस्तुत की। लड़की के पिता यह सुनते ही समझ गए कि इन सभी के साथ कोई वृद्ध व्यक्ति अवश्य आया हुआ है। बारातियों ने इस बात को छुपाने के लिए लंबा प्रयास किया किन्तु लड़की का पिता यह मानने को तैयार न हुआ कि बारातियों में कोई वृद्ध व्यक्ति नहीं आया है।
अंततः बात खुल गई और तब लड़की के पिता ने बताया कि उनके द्वारा यह शर्त इसलिए रखी गई थी क्योंकि वे चाहते थे कि उनके मना करने के बाद भी बारात में कम से कम एक वृद्ध को ले कर आया जाए। जिस परिवार में वृद्धों का सम्मान नहीं किया जाता, वह परिवार धन तो कमा सकता है पर अनुभव व सामाजिक ज्ञान से वंचित रह जाता है। वृद्धजन का अनुभव व विशिष्ट ज्ञान न कोई पुस्तक दे सकती है और न ही तकनीकों का अपार ज्ञान। बिना आयु का निवेश किए इस प्रकार का अनुभव पुख्ता रूप से प्राप्त नहीं किया जा सकता। वृद्धजन का सम्मान कर उनसे उनके अनुभव व विशिष्ट ज्ञान प्राप्त करने में ही बुद्धिमानी भी है और महानता भी।

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©® सन्दर्भ मिश्र

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सन्दर्भ मिश्र 'फ़क़ीर'
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वाराणसी
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