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बादल_____ गगन

सगीता शर्मा

सगीता शर्मा

कविता

February 27, 2017

बादल – गगन
मुक्त सृजन.
मनभावन.
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सागर सी गहराई दिल में
चाहत उतनी बसी है दिल में
छू लूँ गगन ये दिल मेरा चाहे.
रोको न यू अब तुम मेरी राहे.
मन तो पंछी बन उड़ जाये.
ये जग न अब मन को भाये .
प्यार भरा संसार मिला है.
न अब तुमसे कोई गिला है.
ख्वाब सजा पलको पे बिठा लो
सपना बना नैनो में सजा लो.
बादल बरखा बन बरसूँगी.
तुझ से इतना प्यार करूँगी.
छू के बदन योवन है निखरा.
अब न मिलन को तू यू तरसा.
भुला दिया है उन गलियो को.
छोड के आई संग सखियो को.
प्रीत में तेरी रंग ली चुनरिया.
आ गई मैं तो प्रेम नगरिया.

संगीता शर्मा.
26/2/2017

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Author
सगीता शर्मा
परिचय . संगीता शर्मा. आगरा . रूचि. लेखन. लघु कथा ,कहानी,कविता,गीत,गजल,मुक्तक,छंद,.आदि. सम्मान . मुक्तर मणि,सतकवीर सम्मान , मानस मणि आदि. प्यार की तलाश कहानी पुरस्क्रति.धूप सी जिन्दगी कविता सम्मानित.. चाबी लधु कथा हिन्दी व पंजाबी में प्रकाशित . संगीता शर्मा.

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