बादल अच्छा लगता है

दूर गगन तक फैला बादल अच्छा लगता है
है थोड़ा आवारा पागल अच्छा लगता है

नीले नीले कपड़े इसके श्वेत रुई से गाल
कभी लगाता है जब काजल अच्छा लगता है

चाँद सजाता है बादल के माथे पर बिंदी
टँका सितारों का भी आँचल अच्छा लगता है

कभी डराता काला बादल कभी धूप में बरसे
करता रहता अक्सर ये छल अच्छा लगता है

चित्र बनाता रहता बादल नभ में नये नये
इंद्रधनुष जब बनता वो पल अच्छा लगता है

उमड़ घुमड़ कर गरज गरज करे ‘अर्चना’ बातें
जब बरसाता है बादल जल अच्छा लगता है

16-07-2019
डॉ अर्चना गुप्ता
मुरादाबाद

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