कविता · Reading time: 1 minute

बात

बात
✍✍✍✍

बात
जो कहनी है
लबों तक आती है
कुछ देर ठहर
देख तुझे
गुम हो जाती है
संकेत कुछ
सही कहो या गलत
अपने से खो
जाने के या
दिल में किसी के
उतर जाने के
लगते है

बात
तुम्हारी सहज
और सही
लगती है
क्योंकि तुम
भुक्तभोगी नहीं हो
इसलिये सुन
बात मेरी
मुस्करा कर
रह जाते हो

डॉ मधु त्रिवेदी

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