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बात पिया मानो तुम डारो ने हौआ

बात पिया मानो तुम डारो ने हौआ
पी करके आए तुम दारू को पौआ
दूरई रहो तुमरो मुंह जो बसाबे
आकरके रोजीना काहे नासाबे
मर जेहो इक दिन ना खाबे जे कौआ
बात पिया मानो तुम डारो ने हौआ
कर कर तुमने जा लेनई लगा दई
पी पीके दारू जा नदिया बहा दई
कृष्णा जी मानो करो ने कह रौआ
बात पिया मानो तुम डारो ने हौआ
कृष्णकांत गुर्जर

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संप्रति - शिक्षक संचालक -G.v.n.school dungriya लेखन विधा- लेख, मुक्तक, कविता,ग़ज़ल,दोहे, लोकगीत भाषा शैली - हिंदी और बुन्देली भाषा में रचनाएं रस - मुख्य रूप से करुण रस, श्रृंगार रस,…
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