बात तो होने दो ।

ज़िन्दगी कट जाएगी उससे बात तो होने दो
वो ख़्वाबो में भी आएगी ज़रा रात तो होने दो ।

वो अब संवरती भी नही है शायद देर तक ,
चाँद है शायद अभी मुलाकात तो होने दो ।

मेरे हिस्से में जो है वो फ़कत मिल ही जायेगा
मेरे अंदर थोड़ी अभी जज़्बात तो होने दो ।

वो आएंगे दिल की दरवाजों तक पता है मुझे
अभी दिल की भी थोड़ा इंतेजमात तो होने दो ।

ये मौसम भी अब सुहाना सा लग रहा मुझें ,
तुम्हें ठंडक चाहिए , बरसात तो होने दो ।

मैं कौन हूं ये जानता है अब जमाना मुझें ,
मैं छोड़ दूंगा तुझें पहले अज्ञात तो होने दो ।

माना मेरी शराफ़त की मिसाल दी जाती है
अभी वाकिफ़ कहा हो विश्वासघात तो होने दो ।

तुम्हारे ये तेवर मुझें रास नही आती अब
इतनी जल्दी क्या है अभी औक़ात तो होने दो ।

मेरी मंजिल अब कोसों दूर नही …
तुम ख़ुद में ही मर जाओगे शुरुआत तो होने दो ।

इतनी जल्दी भी क्या थी मेरे हिस्से में आने की
ज़रा ठहरो तो सही पहले ख़ैरात तो होने दो ।

मेरा ही नाम लेकर ये जमाना जानेगा उसे
उनसे मेरी पहले अभी तालुक्कात तो होने दो ।

लोग कह रहे है हमें हम इश्क़ में मशगूल है ,
पहले मेरे दिल की तहकीकात तो होने दो ।

मैं लिख दूंगा ख़ुद की विरासत भी एक दिन
पहले मेरी पूरी क़ायनात तो होने दो ।

-हसीब अनवर

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like 3 Comment 0
Views 75

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share