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बात की बात करूँगा

Abhishek Parashar

Abhishek Parashar

कविता

June 17, 2017

बात की बात करूँगा
आदमी हूँ आदमी से आदमियत का ही इज़हार करूँगा।
और उनसे ही तो मैं ऐसे बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी…………………
फ़र्जी नक़ाब पहने रखते हैं कुछ लोग,
उन्हें देखकर परखकर ही तो बात करूँगा,
आदमी हूँ आदमी…………………
झूठ का पुलिंदा लिए घूमते हैं कुछ लोग,
उसे खोलकर देखकर ही तो बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी…………………
बे-वज़ह टकराते हैं भले इंसान से कुछ लोग,
दो-दो हाथ करके ही तो उनसे बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी…………………
ना-नकुर करते है हर चीज़ में कुछ लोग,
उन्हें समझाकर कर ही तो बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी…………………
ज़माने में इतने भले होते हैं कुछ लोग,
भलाई सीखने के लिए तो बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी………………..
बड़े शरीक हैं उसकी इबादत में कुछ लोग,
उसकी इबादत के लिए तो बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी…………………
तरक्की की इमारत खड़ा करते हैं कुछ लोग,
तरक्की की तामील के लिए तो बात करूँगा।
आदमी हूँ आदमी………………… ##अभिषेक पाराशर##9411931822

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Author
Abhishek Parashar
शिक्षा-स्नातकोत्तर (इतिहास), सिस्टम मैनेजर कार्यालय-प्रवर अधीक्षक डाकघर मथुरा मण्डल, मथुरा, हनुमत सिद्ध परम पूज्य गुरुदेव की कृपा से कविता करना आ गया, इसमें कुछ भी विशेष नहीं, क्यों कि सिद्धों के संग से ऐसी सामान्य गुण विकसित हो जाते है।... Read more

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