दोहे · Reading time: 1 minute

बाणा

ना मैं मंदिर में मिलूँ, ना देवालय मीर
सीरत मेरी इश्क है, बाणा धरुँ फकीर
शीला गहलावत सीरत
चण्डीगढ़, हरियाणा

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