बाल कविता · Reading time: 1 minute

उपवन

मम्मी ने माली बुलवाया
छत पर ही उपवन बनवाया

बड़े बड़े गमले मंगवाये
पौधे छोटे बड़े लगाये
रोज उन्हें पानी देने को
इक फव्वारा भी मंगवाया

हमको करनी है रखवाली
माँ ने जिम्मेदारी डाली
जब उत्पाती बंदर आते
मार के डंडा उन्हें भगाया

कहीं फूल थे कहीं सब्जियां
रंगबिरंगी खूब तितलियाँ
प्यार करो कुदरत से अपनी
मम्मी ने यूँ पाठ पढ़ाया

09-04-2018
डॉ अर्चना गुप्ता

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