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बाकी है

उड़ान के लिए सारा आसमान बाकी है ।
अभी तो वक्त की पूरी दासतान बाकी है।

किताब जब जिदंगी की पलटे पेज अपना
समझ ले फिर कोई इम्तिहान बाकी है।

मिले गर वक्त से कुछ पल जो राहत के
ए जिदंगी फिर देख पुरा जहान बाकी है।

गुजार के देखो वक्त माँ के आंचल मे तुम
सभी होगी पल मे दुर जो थकान बाकी है।

किसी के धैर्य का नाजायज फायदा न उठा
समुनदर शांत हो भले के उफान बाकी है।

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Mohan Bamniya
Mohan Bamniya
Panipat Haryana
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प्रणाम दोस्तों मै एक साधारण जीवनशैली का व्यक्ति हूँ ।मैं कोई बड़ा लेखक-कवि नहीं हूँ...
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