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बाँध कर लाये थे ज़ुल्फ़ों में वो काली रात भी

MONIKA MASOOM

MONIKA MASOOM

गज़ल/गीतिका

November 11, 2017

थी जुबां खामोश पर वो कर रहे थे बात भी
खोल आँखों ने दिये मन के सभी जज्बात भी

अश्कों ने फिर प्यार का इजहार कुछ ऐसे किया
ज्यों सुनहरी धूप में होने लगे बरसात भी

नूर उनके रूप का उस चाँद से कुछ कम न था
बाँध कर लाए थे ज़ुल्फों में वो काली रात भी

मुस्कुराने हम लगे जो उनका चेहरा देखकर
वो ये समझे ठीक हैं अपने बुरे हालात भी

हाथ में ऐसे हमारे हाथ उनका आ गया
मिल गई किस्मत से हमको प्यार की सौगात भी

ले रहे ‘मासूम’ लब से थे दवा का काम वो
पर नज़र के नश्तरो से कर रहे थे घात भी

मोनिका “मासूम”???

Author
MONIKA MASOOM
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