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बाँट रहे रे

विजय कुमार नामदेव

विजय कुमार नामदेव

गज़ल/गीतिका

February 4, 2017

बेशर्म की कलम से

अब ना अपने ठाठ रहे रे।
निज जख्मों को चाट रहे रे।।

कलतक जो मेरे अपने थे।
वो ही मुझको डांट रहे रे।।

क्रीम पावडर के इस युग में।
हर कोई दिखता हॉट रहे रे।।

भैया जी को मिली रेबड़ी।
चीन्ह चीन्ह कर बाँट रहे रे।।

जिससे पूछा हाल बेशरम।
कहे समय को काट रहे रे।।

विजय बेशर्म
गाडरवारा 9424750038

Author
विजय कुमार नामदेव
सम्प्रति-अध्यापक शासकीय हाई स्कूल खैरुआ प्रकाशित कृतियां- गधा परेशान है, तृप्ति के तिनके, ख्वाब शशि के, मेरी तुम संपर्क- प्रतिभा कॉलोनी गाडरवारा मप्र चलित वार्ता- 09424750038
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