कविता · Reading time: 2 minutes

बहु बिटिया

बहु भी बेटी ही होती है ,
हृदय से स्वीकार करो ।

विवाह एक स्त्री के लिए ,
होता है पुनर्जन्म की भांति ।
अतःबहु बिटिया को पालना ,
उसके माता पिता की भांति ।

खुद आपके घर नही आई वो ,
विधि ने ही आपके पास है भेजा ।
आपके पुत्र की भार्या बनाकर ,
स्वयं ईश्वर ने ही उसे है भेजा ।

रूप बहु का धार के एक ,
ही घर में आपके आई है।
बस इतना विचार करो ।
वो भी है आपकी संतान ,
आपका प्यार लेने आई है।

कुछ भूल हो जाए उससे तो ,
क्षमा कर उसे समझा दो ।
अपनी ही संतान समझकर ,
उसे अपना जीवन जीने दो ।

बंद करो टोकना,रोकना ,
गलतियां नजर अंदाज करो ।
आपकी संतान से भी होती होगी ,
गलतियां ,उसे भी स्वीकार करो।

वो बहु ,बेटी ही नही आपकी ,
उसे अपना भी मित्र समझो ।
वो ही सहारा अब आपका ,
उसे हमराज / हमदर्द समझो ।

गृह प्रबंधन में सामंजस्य बिठाने में ,
और उसे अपने परिवेश में ढालने में,
सहयोग दो अपने नए घर को समझने में,
उसकी सहायता करो ।

उसके विचारों ,भावनाओं को
समझो और सम्मान दो ।
उसके परिजनों को भी आदर ,
और सत्कार करो ।

व्यवहार में पारदर्शिता अत्यंत ,
आवश्यक है हर रिश्ते के लिए ।
आपको ही सर्व प्रथम पहल करनी होगी ,
बहु से अपने रिश्ते के लिए ।
आप पहल करो ।

बिटिया को अपने रंग में रंगना है ,
तो पहले उसके रंग में रंगो।
उससे प्यार और सम्मान लेना है तो ,
पहले उसे प्यार और दुलार दो ।

इतना प्यार दो उसे की वो अपना ,
मायका भूल जाए ।
हंसे और मुस्कुराए वो आपकी लाडली ,
उसकी आंखों में एक आंसू भी ,
आने ना पाए ।

फिर देखना उसपर आपके प्यार,
और दुलार का क्या असर होगा ।
आपकी प्यारी बहु बिटिया का दिल ,
आपके लिए सम्मान और प्यार से लबरेज होगा ।

आपके घर को स्वर्ग वो जरूर बनाएगी ,
आपके घर की लक्ष्मी है वो।
आपके दुख सुख में भागीदार,आपका मान ,
एक देवी / परी है वो।

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