बहुत हैं ख्बाईशे

ख्बाईशे बहुत ज्यादा पाल रखी है मैने
जानता हूँ जिन्दगी छोटी है और ख्बाईशे लम्बी हैं

ख्वाइशों के लिए दिन रात भागता भटकता हूँ
नहीं मिले तो , लूट खसोट करता हूँ

जानता हूँ ख्वाइशों के समुन्दर में डूब जाऊंगा
जाऊंगा जब दुनियाँ से , खाली हाथ ही जाऊँगा

संभल जा ऐ इन्सान ख्बाईशे कम नहीं होंगी
नेक काम, नेक इरादे ही पहचान तेरी होगी

Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share
Sahityapedia Publishing