बहुत हैं ख्बाईशे

ख्बाईशे बहुत ज्यादा पाल रखी है मैने
जानता हूँ जिन्दगी छोटी है और ख्बाईशे लम्बी हैं

ख्वाइशों के लिए दिन रात भागता भटकता हूँ
नहीं मिले तो , लूट खसोट करता हूँ

जानता हूँ ख्वाइशों के समुन्दर में डूब जाऊंगा
जाऊंगा जब दुनियाँ से , खाली हाथ ही जाऊँगा

संभल जा ऐ इन्सान ख्बाईशे कम नहीं होंगी
नेक काम, नेक इरादे ही पहचान तेरी होगी

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 2

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share