23.7k Members 50k Posts

बहारों का जमाना

क्या फिर लौट के आएगा,जमाना बहारों का ?
रूठा हुआ है आजकल मैख़ाना यारों का ।।
थकते न थे जो साथ चलते हुए, चुपचाप बैठें हैं हाथ मलते हुए।।
खामोश लब हैं ,उदास हैं निगाहें, साथ चलने वालों की जुदा हो गई राहें।।
न डोला रहा,न जमाना कहारों का, कैसे लौट के आये जमाना बहारों का।।
अरे चुप ये दिल, क्यों तू मचलता है,क्यों नहीं जमाने के संग चलता है?
क्यों उगल देता है वेबक्त बातें,क्यों नहीं जमाने जैसा रंग बदलता है?
क्यों लड़ता है,हर झूठी बात पर,क्यों नहीं कहता सब चलता है?
बदलते रंग बदलती फ़िज़ा में,क्या काम है दिलदारों का?
मुमकिन है बदल जाना,जमाना बहारों का ।।
सीख ढ़लना उधर,जिधर जमाना ये ढलता है ।!
कह जमाने से,साहेब सब चलता है !।
ला मिठास चापलूसी की जुबां पर,क्यों बेकार हाथ मलता है ?
बन जा आँख का तारा हर किसीका,क्यों सूरज जैसा ढ़लता है ?
सजा ! महफ़िल लौटेगा जमाना बहारों का।।
आबाद हो जायेगा ,रूठा मैख़ाना यारों का ।।

222 Views
सोबन सिंह रावत
सोबन सिंह रावत
11 Posts · 1.1k Views
जन्म स्थान-ग्राम पोस्ट खवाड़ा बासर टिहरी गढ़वाल उत्तराखंड ।ग्राम पंचायत अधिकारी(पंचायत सचिव ) के पद...