Feb 15, 2019 · कविता
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【6】*०* आप बहादुर हो *०*

अब समय नहीं है रोने का, सूखे हुए जख्म भिगोने का
जो समय निकलकर चला गया, वो समय न अपना होने का
अब समय नहीं है…………..
{1} जो भूल हुई अंजाने में, उस भूल को न दोहराने का
राही बनकर चल उस पथ पर, जहाँ दर्द भरा हो जमाने का
जर्रा – जर्रा भी कांप उठे, तू अपने कदम बढ़ाने का
अब समय नहीं है……………
{2} कुछ भला कहैं कुछ बुरा कहैं, तू नव इतिहास बनाने का
विरान पडी़ इस दुनियाँ में, खुशियों की लहर दौडाने का
काटों से भरी है राह तेरी, तू प्रण कर आगे जाने का
अब समय नहीं है……………
{3} आयी बाधाओं से लडकर, तू सुख सागर को लाने का
मुश्किल न रोक सकें तुझको, चहुँ ओर तू सुख बरसाने का
ये जग वाही – वाही करदे, तू ऐसी कसम निभाने का
अब समय नहीं है……………
{4} जीते जी जग में अमर बने, तू ऐसा ध्वज फहराने का
जग को पथ प्रदर्शक बनकर, तू सबको राह दिखाने का
अपने साहस की मिशाल बना, तू अटल वीर बन जाने का
अब समय नहीं है…………….
{5} पैगाम दे तू दुनियाँ को, कष्टों से न घबराने का
जिनके मन बिल्कुल हार गये, उन्हें नया हौसला लाने का
तू धीर बने तू वीर बने, भारत मान बढाने का
अब समय नहीं है …………….
सीखः- हमें ईश्वर ने अनंत 【अपार】शक्तियाँँ प्रदान की हैं। इसलिए हमें अपने आप को कमजोर नहीं समझना चाहिए।
Arise DGRJ { Khaimsingh Saini }
M.A, B.Ed from University of Rajasthan
Mob. 9266034599

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Khaimsingh Saini
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