बस माँ समझ पाती है

बस माँ समझ पाती है

मेरे भीतर दबे अरमानों को
बस माँ समझ पाती है
होता हूँ माँ से दूर
मुझे हिचकी बहुत आती है
अपने बच्चों को परेशान देख
माँ कब चैन से सो पाती है
बच्चों की हर विपदा को बस
माँ समझ पाती है
नौ माह कोख में रख
नाजाने कितने कष्ट सह
एक नयी दुनिया हमे दिखाती है
एक माँ कब दर्द अपना बताती है
माँ की दुआ ही तो ज़िन्दगी बनाती है
बच्चों की ख़ुशी के लिए
अपनी हर इच्छा माँ दबाती है
अपनी दुनिया भी माँ को बस
अपने बच्चों में ही नजर आती है
बिन बोले बच्चों के कर भाव को
बस माँ समझ पाती है

भूपेंद्र रावत
28/12/2017

क्या आप अपनी पुस्तक प्रकाशित करवाना चाहते हैं?

साहित्यपीडिया पब्लिशिंग द्वारा अपनी पुस्तक प्रकाशित करवायें सिर्फ ₹ 11,800/- रुपये में, जिसमें शामिल है-

  • 50 लेखक प्रतियाँ
  • बेहतरीन कवर डिज़ाइन
  • उच्च गुणवत्ता की प्रिंटिंग
  • Amazon, Flipkart पर पुस्तक की पूरे भारत में असीमित उपलब्धता
  • कम मूल्य पर लेखक प्रतियाँ मंगवाने की lifetime सुविधा
  • रॉयल्टी का मासिक भुगतान

अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक करें- https://publish.sahityapedia.com/pricing

या हमें इस नंबर पर काल या Whatsapp करें- 9618066119

Like Comment 0
Views 25

You must be logged in to post comments.

Login Create Account

Loading comments
Copy link to share