बस तू शुरुवात कर

सूरज भी हारेगा
तेरी रोशनी से
आभा प्रतिभा से तेरी
बस तू शुरुवात कर
नया कदम उठा

जो सीखा अब तक
उसे उपयोग में ला
कुछ नया कर
कुछ नया बना
अपनी सोच से
संसार को बदल
बस नई शुरुवात कर
नया कदम उठा

क्यों खुद को
कम समझता है
क्यों वंचित में
जीता है
बेचारा नही
शहंशाह है तू
बस नई शुरुवात कर
नया कदम उठा …

– आनंदश्री

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